श्रीगंगानगर जिले के अरोड़ स्तम्भ

बाऊजी यानिकि श्री राधेश्यामः
मात्र शहर नहीं, पूरे इलाके और राजस्थान एवं सीमावर्ती पंजाब व हरियाणा के चिपते क्षेत्रों में बाऊजी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे एक जानी-मानी शख्सियत हैं, प्रतिष्ठित अरोड़वंशी हैं और सम्मानीय राजनेता हैं। अपने हो या पराये सभी श्री राधेश्याम को प्यार से बाऊजी कहकर पुकारते हैं यानि कि बाऊजी उनका आदर्श सूचक निकनेम है।

शांत व्यक्तित्त्वः
जब से होश संभाला है बाऊजी श्री राधेश्याम चर्चाओं में रहने के शौकीन रहे हैं। असल में अक्सर वे खुद विवाद पैदा करते हैं और उस विवाद से जूझना उनका पसंदीदा काम रहा है। बाऊजी का सीना 56 ईंच का है या उससे बड़ा न कभी नापा न उनसे कभी पूछा, लेकिन उनका Contene से मुश्किल दौर में भी 56 से भी कहीं ज्यादा रहा है।

श्री हरिसिंह कामराः
श्री हरिसिंह कामरा व्यापारी भी हैं, नेता भी हैं, अशोक नागपाल से जिला भाजपा की कमान संभालने के बाद पार्टी को ताकत देने के लिए श्री कामरा को प्रदेश नेतृत्व ने भाजपा का जिलाध्यक्ष बनाया। पार्टी के सशक्तिकरण में कामरा जी की अहम भूमिका है, लेकिन वह स्वयं को पार्टी से बंधा हुआ स्वीकार करने के अतिरिक्त सामाजिक क्षेत्र में भी अपने दायित्वों का निर्वाह करने में पीछे नहीं रह रहे। कोई भी पीड़ित या फरियादी उनके पास जाये तो वे उसे निराश नहीं होने देते। छलकपट से दूरी बनाये रखने वाले श्री हरिसिंह कामरा अरोड़वंशियों की सेवा चाकरी से भी नहीं चूकते। उनकी कार्यशैली जीवन पद्धति को देखकर अरोड़वंशी उन पर गर्व करते हैं

श्री बहादरचंद नारंगः 
राजनीति में आने से पूर्व श्री बहादरचंद नारंग व्यापारियों के हितों के लिए संघर्ष करते रहे। भारतीय जनता पार्टी का पल्लू थामा। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें पार्टी का जिलाध्यक्ष नवाजा गया। जिले में भाजपा का यह शैश्व काल था। पार्टी का जनाधार बनाने के लिए श्री नारंग ने अथक परिश्रम किये। अपने कारोबार तक से विमुख हो गये। पार्टी में ऑक्सीजन फूंकी गई। सदस्य बनाये गये। नारंग अपने जीवनभर अपने राजनीतिक कुचक्रों से दूर रहे। एक सीधेसादे राजनेता के रूप में उन्होंने कार्य किया । अरोड़वंश के समय के स्वाभिमान को बनाये रखने के लिए ईमानदारी को अपने जीवन का अंग बनाया। वे अरोड़वंशियों के दिलों में आज भी सम्मान जनक स्थान रखते है। यह पदमपुर नगरपालिका के वर्ममान अध्यक्ष भी हैं।

श्री अशोक नागपालः
अरोड़वंशियों में श्री अशोक नागपाल को पूरी प्रतिष्ठा है। वे सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों में ही नहीं बल्कि सामाजिक शैक्षणिक धार्मिक आदि कार्यों में भी सक्रिय रहते है। अपना कारोबार परिजनों को सौंपकर समाज सेवा के जरिये मानव धर्म का पालन करने को वरियता दे रहे हैं। भाजपा की टिकट पर विधायक भी रह चुके हैं। वे सूरतगढ़ के एक लोकप्रिय विधायक रहे। अरोड़ा समाज की उन्नति के लिए वे हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं। सामाजिक ढंग से लपेटे में लेकर उनके सियासी वजूद को झटका देने में उनके विरोधी एक बार तो सफल हो गये, मगर असलियत सामने आने पर उनकी भाजपा में ससम्मान वापिसी हुई। सही कहें तो उस झटके से अशोक नागपाल कुछ दिनों तक विचलित रहे लेकिन अब पुनः वे अपने श्रेय मार्ग की पगडंडी पर चल रहे हैं। उनके पिताजी मुन्नीलाल नागपाल व श्री दुर्गादत नागपाल अनुपगढ़ तहसील की मण्डी रामसिंहपुर, श्रीविजयनगर के अग्रणीय जन सेवक रहे है। उनकी नागपाल सर्वमान्य जन नेता है।